प्रवीण चौहान – एक उद्यमी जो महाबोधि मंदिर के अनुपयुक्त हो चुके फूलों से करवा रहे खादी वस्त्रों की रंगाई

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colour made from flowers
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इस दुनिया में दो तरह के ळोग होते हैं जो पहले वह जो कोई वस्तु एक बार उपयोग में आने के बाद उसे फेंक देते हैं और दूसरे वो जो जब सामन उपयोग में आ जाने के बाद बर्बाद हो रहा होता हैं तो अपने दिमाग पर दबाव डालते हैं कि क्या इससे हम कुछ उपयोगी और रचनात्मक कर सकते हैं ।

लेकिन हम में से कुछ ही इसमें से कुछ उपयोगी विकसित कर सकते हैं। खैर हम एक ऐसे इंसान को जानते है जो अपने कुछ अद्भुत कार्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहारियों को गर्वान्वित कर रहा है।

प्रवीण चौहान बिहार के गया जिले का एक सामाजिक उद्यमी और डिजाइनर हैं। उन्होंने अपने सभी कारीगरों के सहयोग से MATR (मातृ) नामक एक सामाजिक उद्यम की स्थापना की है। एमएटीआर का उद्देश्य स्थानीय आर्टिसन समुदायों के कौशल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डिजाइनरों और खुदरा ब्रांडों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले खादी कपड़े और वस्त्र बनाने के लिए उपयोग करना है। उनके उत्पाद की खास बात ये है की, वे एक स्थायी भविष्य के लिए पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार पहलों को बढ़ावा देने के लिए अपने पूरे उत्पादन में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं।

pravin chauhan -matra gaya

खादी को पुनर्जीवित करने के लिए बिहार का दौरा
हाल ही में प्रवीण चौहान राज्य के उन सभी हिस्सों में खादी को पुनर्जीवित करने के लिए एक दौरा पर गए थे जहां बुनकरों को बाजार के रुझानों, अभिनव डिजाइनों की कमी, अपर्याप्त मात्रा में कच्चे माल और धागे की खराब गुणवत्ता जैसी अनजानता जैसी समस्याएं आईं। इन पहलुओं ने खादी के निर्यात को विफल कर दिया। खादी क्षेत्र को ऊपर उठाने के लिए, इन मुद्दों को सरकारी समर्थन के साथ हल किया जा रहा है |

हैप्पी हैंड प्रोजेक्ट
हैप्पी हैंड प्रोजेक्ट एमएटीआर औरऑस्ट्रेलियाकी एक संस्था बिकॉज़ ऑफ़ नेचर के बीच एक प्रकार का मिला जुला प्रोजेक्ट है जिसका मकसद बिहार में बने खादी पर प्राकृतिक रंगों के माध्यम से लोगों को टिकाऊ रोजगार दिलाने का है ।

अब बात करते है मुख्य मुद्दे पर

अब बात करते है मुख्य मुद्दे पर, दरअसल हाल ही में, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति और द हैप्पी हैंड प्रोजेक्ट के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं जिसके तहत मंदिर में फूलों के संग्रह का उपयोग प्राकृतिक डाई बनाने के लिए किया जायेगा

फूलों से रंगो के निकलने और कड़ी के रंगाई की प्रक्रिया

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परियोजना का मुख्य उद्देश्य

  • इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य महाबोधि मंदिर में प्रार्थनाओं और सजावट के दौरान प्रस्तावित फूलों का उपयोग करना है जो उपयोग के बाद अप्रयुक्त हो गए थे। बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के समर्थन से, हैप्पी हैंड प्रोजेक्ट प्राकृतिक रंगों को बनाने के लिए उन फूलों का उपयोग करके इस के तहत आसपास ५० महिलाओं को रोजगार का अवसर प्रदान करेगा। बीटीएमसी हैप्पी हैंड प्रोजेक्ट के माध्यम से मात्र और बिकॉज़ ऑफ़ नेचर को उन फूलों को इकट्ठा करने की अनुमति देगी जो मंदिर में के बाद अप्रयुक्त रहती हैं।
  • इस परियोजना का लक्ष्य कारीगर समुदायों के कौशल को बढ़ावा देना है और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले खादी कपड़े, वस्त्र बनाने के लिए इन कारीगरों का समर्थन करने का है ।
  • इसके अलावा सभी विदेशी नागरिकों और पर्यटकों को पेशकश करने के लिए गया के पास कुछ रचनात्मक होगा ताकि अगली बार जब वे महाबोधि मंदिर से जाएंगे तो वे उनके साथ गया का सार ले सकते हैं। इस कार्य से विश्व में गया के मान में और वृद्धि होगी ।

ज्ञात रहे महाबोधि मंदिर बौद्धों के लिए दो हजार से अधिक वर्षों से एक प्रमुख तीर्थ स्थल रहा है, और कुछ तत्व शायद अशोक की अवधि की है।

प्रवीण चौहान के इस  कदम की सराहना

महाबोधि मंदिर में उठाये जा रहे इस तरह के कदम के लिए प्रवीण चौहान की सराहना सब जगह की जा रही है । उनके सच्चे समर्पण ने बिहार खादी को ऑस्ट्रेलिया, लंदन, न्यू यॉर्क, मिलान, पेरिस और अन्य स्थानों में बहुत प्रसिद्ध किया है जो फैशन और लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है ।

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